The Life Sketch of the Spectacular International Spiritual Speaker & Singer - Vandna Shri

शिव लीला

शिव लीला

शिव - पार्वती विवाह लीला

माँ पार्वती को समझाने की कोशिश ◦ माता पार्वती भगवान शिवजी से विवाह करने की इच्छुक थीं. सभी देवता गण भी इसी मत के थे कि पर्वत राजकन्या पार्वती का विवाह शिवजी से होना चाहिए, देवताओं ने कन्दर्प को माँ पार्वती की मदद करने के लिए भेजा, लेकिन शिवजी ने उन्हें अपनी तीसरी आंख से भस्म कर दिया, अब माँ पार्वती ने तो ठान लिया था कि वो विवाह करेंगी तो सिर्फ भोलेनाथजी से, शिवजी को अपना वर बनाने के लिए माता पार्वती ने बहुत कठोर तपस्या शुरू कर दी, उनकी तपस्या के चलते सभी जगह हाहाकार मच गय ! बड़े-बड़े पर्वतों की नींव डगमगाने लगी, ये देख भोले बाबा ने अपनी आंख खोली और पार्वती से आह्वान किया कि वो किसी समृद्ध राजकुमार से शादी करें, शिवजी ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक तपस्वी के साथ रहना आसान नहीं है.

माँ पार्वती की जिद के आगे झुके भोलेनाथ

लेकिन माता पार्वती तो अडिग थीं, उन्होंने साफ कर दिया था कि वो विवाह सिर्फ भगवान शिव से ही करेंगी. अब पार्वती की ये जिद देख भोलेनाथ पिघल गए और उनसे विवाह करने के लिए राजी हो गए. शिवजी को लगा कि माँ पार्वती उन्हीं की तरह हठी हैं, इसलिए ये जोड़ी अच्छी बनेगी.

अब शादी की तैयारी जोरों पर शुरू हो गई. लेकिन समस्या ये थी कि भगवान शिव एक तपस्वी थे और उनके परिवार में कोई सदस्य नहीं था. लेकिन मान्यता के मुताबिक एक वर को अपने परिवार के साथ जाकर वधू का हाथ मांगना पड़ता है. अब ऐसी परिस्थिति में भगवान शिव ने अपने साथ डाकिनियां, भूत-प्रेत और चुड़ैलों को साथ ले जाने का निर्णय किया. तपस्वी होने के चलते शिव इस बात से अवगत नहीं थे कि विवाह के लिए किस प्रकार से तैयार हुआ जाता है. तो उनके डाकिनियों और चुड़ैलों ने उनको भस्म से सजा दिया और हड्डियों की माला पहना दी.

जब भस्म लपेटे महादेव को देखकर डर गईं पार्वती की मां

जब ये अनोखी बारात पार्वती के द्वार पहुंची, सभी देवता हैरान रह गए. वहां खड़ीं महिलाएं भी डर कर भाग गईं. भगवान शिव को इस विचित्र रूप में पार्वती की माँ स्वीकार नहीं कर पाईं और उन्होंने अपनी बेटी का हाथ देने से मना कर दिया. स्थितियां बिगड़ती देख पार्वती जी ने भगवान शिव से प्रार्थना की वो उनके रीति रिवाजों के मुताबिक तैयार होकर आएं. शिव जी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और सभी देवताओं को फरमान दिया कि वो उनको खूबसूरत रूप से तैयार करें. ये सुन सभी देवता आ गए और उन्हें तैयार करने में जुट गए. भगवान शिव को दैवीय जल से नहलाया गया और रेशम के फूलों से सजाया गया. थोड़ी ही देर में भोलेनाथ कंदर्प से भी ज्यादा सुंदर लगने लगे और उनका तेज तो चांद की रोशनी को भी मात दे रहा था.

जब भगवान शिव इस दिव्य रूप में पहुंचे, पार्वती जी की माँ ने उन्हें तुरंत स्वीकार कर लिया और ब्रह्मा जी की उपस्थिति में विवाह समारोह शुरू हो गया. माता पार्वती और भोलेबाबा ने एक दूसरे को वर माला पहनाई और ये विवाह संपन हुआ.

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